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पीठ पीछे क्या करती है आपकी गर्लफ्रेंड

उसने मुझे धोखा दिया, पर मैंने उसका क्या बिगाड़ा था…. मैं तो बस उससे प्यार करती थी. उसके अलावा कभी किसी का ख्याल तक अपने दिल में नहीं आने दिया, उसके अलावा कभी किसी की तरफ पलट कर तक नहीं देखा..फिर क्यों उसने ऐसा किया????

अब इसे डायलॉग कहें या फिर दर्दभरी दास्तां लेकिन महिलाओं को अकसर अपनी सहेलियों से ऐसी बातें करते हुए बड़ी ही आसानी से सुना जा सकता है. बस उनका अपने ब्वॉयफ्रेंड से ब्रेक-अप होने की देर है फिर तो ऐसा हो जाता है जैसे कि उनका ब्वॉयफ्रेंड क्या दुनिया के सारे लड़के धोखेबाज ही होते हैं और लड़कियों की किस्मत में तो सिर्फ धोखा खाना या फिर रोना ही लिखा है.
कुछ हद तक सही भी है कि अधिकांश मसलों में धोखा स्त्री को ही खाना पड़ता है, उनके ब्वॉयफ्रेंड या पति उनकी पीठ पीछे उन्हें धोखा देते हैं और सच सामने आने पर चोट बेचारी महिला को ही लगती है. लेकिन हर बार ऐसा हो ये सही नहीं है क्योंकि आजकल महिलाएं भी कुछ नहीं हैं. वह अपने पति या ब्वॉयफ्रेंड को धोखा देने में कोई कसर नहीं छोड़तीं, बस मौका मिलने की देर है.
खासकर जब पैसे और शोहरत की बात आती है तो महिलाएं भी पुरुषों को धोखा देने में पीछे नहीं हटतीं. हाल ही में हुए एक सर्वे से यह पता चला है कि ऊंचे पदों पर बैठी महिलाएं भी उसी तरह अपने साथी को धोखा दे रही हैं जिस तरह उनके पति उन्हें धोखा देते हैं.


अब इसके पीछे भी हम आधुनिकता से ग्रस्त वर्तमान समय की भौतिकवाद से ओत-प्रोत मानसिकता को दोषी ठहरा सकते हैं. रोजाना की आपाधापी और भागदौड़ भरी जीवनशैली के चलते रिश्तों और संबंधों का महत्व बहुत कम रह गया है. मनुष्य की मानसिकता को आधुनिकता ने उल्लेखनीय तरीके से बदला भी है, जिसके चलते पारस्परिक रिश्तों की विश्वसनीयता कहीं खो सी गई है. प्यार और लगाव जैसे शब्द इतने भारी-भरकम हो गए हैं कि महिला हो या पुरुष इनका बोझ उठाने के लिए खुद को तैयार ही नहीं कर पा रहे हैं.
विदेशों में तो महिलाओं द्वारा अपने साथियों को धोखा देने जैसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं लेकिन भारत में यह फितरत अभी सिर्फ शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित है. शहरी क्षेत्र आधुनिकता के बहुत नजदीक हैं, विदेशी हलचलों से भी वह आसानी से अवगत होते रहते हैं. शहरी क्षेत्रों में बड़ी-बड़ी और नामचीन बहुराष्ट्रीय कंपनियां अपने पैर जमा रही हैं और यह भारतीय संस्कृति के लिए और अधिक घातक सिद्ध होता है.
शहरों को हर सुख-सुविधाओं से परिचित कराया जा रहा है, महिलाएं भी पढ़ी-लिखी और समझदार होने से अपने अधिकारों को भली-भांति समझने लगी हैं. उनके दिल में पसंद की भावना पनप रही है जिसकी वजह से वह भी दौलत के लिए अपना सब कुछ छोड़ने के लिए तैयार हो रही हैं.
आधुनिक संदर्भ में देखा जाए तो वे महिलाएं जिन्हें अपने पति से शारीरिक, मानसिक सुख नहीं मिल रहा या उनका साथी उनकी धन संबंधी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ साबित हो रहा है तो वह उनसे पीछा छुड़वाने में देर नहीं करतीं. पैसे के लिए अगर आज महिलाएं अपनी भावनाओं को नजरअंदाज कर अपने साथी को छोड़ रही हैं तो आगे हालात क्या होंगे यह एक चिंताजनक विषय है.

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